भाभी तुम्हारे लंड की गर्मी बढा देगी

Antarvasna, bhabhi ki cudai khani in hindi:

Bhabhi tumhare lund ki garmi badha degi मैं और मेरी पत्नी कविता घर पर बैठे हुए थे हम लोग बैठक में बैठकर चाय पी रहे थे सुबह के 7:00 बज रहे थे कि तभी डोर बेल बजी जब डोर बेल बजी तो मैंने कविता से कहा कविता देखना दरवाजे पर कौन है। कविता जब दरवाजा खोलने गई तो उसने सामने देखा कि उसके माता-पिता हैं कविता बहुत ही खुश हुई और वह उन लोगों के गले मिलने लगी। मैंने भी देखा की कविता के माता पिता बिना बताए ही हमसे मिलने के लिए चले आए, वह जब अंदर आए तो मैंने उन्हें बैठने के लिए कहा। वह लोग बैठे तो मैंने उनसे पूछा कि आपने हमें इस बारे में कोई सूचना ही नहीं दी। मेरे ससुर जी कहने लगे कि हम लोगों ने सोचा कि तुम लोगों से मिले हुए काफी समय हो गया है तो क्यों ना तुम लोगों को मिल ले मैंने उन्हें कहा यह तो आपने बहुत ही अच्छा किया। मेरे ससुर मुझे कहने लगे कि आज तो रविवार है तुम्हारे ऑफिस की छुट्टी होगी मैंने उन्हें कहा हां आज मेरे ऑफिस की छुट्टी है। हम लोग साथ में बैठे हुए थे थोड़ी देर बाद कविता रसोई में चली गई और वह नाश्ते की तैयारी करने लगी कविता की मां भी कविता की मदद कर रही थी।

मेरी और कविता की शादी जब हुई तो उस वक्त हम दोनों बहुत ही खुश थे मैं अपने पुराने दिन याद करने लगा कि कैसे कविता के साथ मैं रिलेशन में था और हम दोनों के रिश्ते को कोई भी स्वीकार करने को तैयार नहीं था लेकिन किसी कविता ने हिम्मत नहीं हारी उसने अपने पापा और मम्मी से बात कर ली जिसके बाद हम लोगों की शादी हो गई। हम लोगों की शादी हो जाने के बाद आज हम दोनों बहुत खुश हैं और मुझे इस बात की भी खुशी है कि कम से कम कविता मेरा ध्यान रख पाती है और मैं कविता को हर वह खुशी देने की कोशिश करता हूं जो मैं कर सकता हूं। हम सब लोगों ने साथ में नाश्ता किया मैं नहाने के लिए बाथरूम में जा चुका था और जब मैं नहा कर बाहर निकला तो मेरे दोस्त सुमित का फोन मेरे नंबर पर आ रहा था मैंने थोड़ी देर बाद सुमित को फोन किया और सुमित से पूछा क्या कोई जरूरी काम था। सुमित मुझे कहने लगा कि हां राजेश मुझे तुमसे मिलना था मैंने सुमित को कहा ठीक है मैं तुम्हारे घर पर अभी आता हूं। सुमित हमारी सोसाइटी में ही रहता है और मैं उसको मिलने के लिए चला गया मैंने अपनी पत्नी कविता को बता दिया था कि मैं सुमित से मिलने के लिए जा रहा हूं।

कविता भी अपने मम्मी-पापा के साथ बैठी हुई थी और वह उनसे बात कर रही थी। मैं जब सुमित के घर पर पहुंचा तो मैंने सुमित के घर की डोरबेल बजाई, सुमित ने दरवाजा खोला उसने दरवाजा खोला तो वह मुझे देखते ही कहने लगा कि राजेश तुम आ गए मैंने सुमित को कहा हां। मैंने उससे कहा क्या कुछ जरूरी काम है तो वह मुझे कहने लगा कि हां मुझे तुमसे कोई बात करनी थी। मैंने सुमित को कहा तुम बताओ तुम्हें क्या बात करनी है, सुमित कहने लगा पहले तुम अंदर आ जाओ मैंने सुमित को कहां ठीक है। हम लोग अंदर बैठ गए मैंने सुमित से पूछा आज कोई घर पर दिखाई नहीं दे रहा तो सुमित मुझे कहने लगा कि आज सब लोग हमारे मामा जी के घर पर गए हैं। मैंने सुमित को कहा तो फिर तुम अपने मामा जी के घर क्यों नहीं गए सुमित मुझे कहने लगा कि पहले मैं जाना तो चाहता था लेकिन फिर मैं जा नहीं पाया। सुमित और मैं साथ में बैठे थे तो मैंने सुमित को कहा सुमित तुम मुझे बता रहे थे कि तुम्हें कुछ काम है। सुमित मुझे कहने लगा कि हां मैं तुमसे कह रहा था कि मुझे फिलहाल कुछ पैसों की आवश्यकता है मैंने सुमित को कहा लेकिन तुम्हें पैसों की जरूरत क्यों है। सुमित ने मुझे कहा तुम बस मेरी मदद कर दो, मैंने तुम्हें से कहा ठीक है तुम मुझसे पैसे ले लेना। मैंने सुमित की मदद कर दी थी उसके बाद मैं अपने घर लौट आया था अगले दिन मैं सुबह अपने ऑफिस के लिए तैयार हुआ और नाश्ता कर के अपने ऑफिस के लिए निकल चुका था। मैं अपने ऑफिस पहुंचा तो उस दिन हमारे ऑफिस में एक जरूरी मीटिंग थी इसलिए सब लोगों को मीटिंग हॉल में बुलाया गया। मीटिंग जब खत्म हुई तो उसके बाद हम लोग अपने काम पर लग गए और शाम के वक्त मैं जब अपने घर लौटा तो कविता मुझे कहने लगी कि आज हम लोग कहीं बाहर डिनर के लिए चलते हैं। मैंने कविता से कहा ठीक है हम लोग कहीं बाहर डिनर के लिए चलते हैं और हम लोग उस दिन बाहर डिनर के लिए चले गए।

हम लोगों के साथ कविता के माता-पिता भी थे इतने समय बाद कविता के माता-पिता हमसे मिलने आए तो वह लोग बहुत ही खुश थे। कविता के पिताजी ने मुझे कहा कि बेटा पहले मैं तुम्हारी शादी कविता के साथ नहीं करवाना चाहता था मैं इस पक्ष में बिल्कुल भी नहीं था लेकिन आज मुझे लगता है कि तुमने कविता का बहुत ही ध्यान दिया और तुम ही कविता को खुश रख सकते हो। मैंने उन्हें कहा मुझे भी इस बात की बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि कविता और मेरी शादी हो पाएगी लेकिन हम लोगों की शादी हो जाने के बाद कविता ने भी मेरा बहुत साथ दिया है। मैं अपनी जॉब से भी खुश हूं और मेरी शादी कविता से हो गई उससे भी मैं बहुत खुश हूं उसके बाद हम लोग घर लौट आए थे घर लौटते वक्त हमे देर हो गयी थी। जब हम लोग घर लौटे तो मैं बहुत ज्यादा थक चुका था और मुझे बहुत गहरी नींद आ गई अगले दिन सुबह मैं अपने ऑफिस के लिए निकला और जब सुबह मैं ऑफिस के लिए निकला तो उस वक्त मुझे सुमित का फोन आया और सुमित मुझे कहने लगा कि राजेश मुझे तुमसे मिलना था।

मैंने सुमित को कहा अभी तो मैं अपने ऑफिस के लिए निकल चुका हूं सुमित कहने लगा कि ठीक है जब तुम अपने ऑफिस से लौट आओगे तो तुम मुझसे मिल लेना। मैंने सुमित को कहा ठीक है मैं जब ऑफिस से घर लौट आऊंगा तो तुमसे मुलाकात करूंगा। मैं शाम को जब ऑफिस से घर लौटने वाला था तो मेरे दिमाग से बात निकल चुकी थी कि मुझे सुमित से मुलाकात करनी है लेकिन उसने मुझे फोन किया और कहा कि तुम घर पर आ जाओ। मैं सुमित से मिलने के लिए उसके घर पर चला गया। जब मैं सुमित से मिलने के लिए गया तो मैंने सुमित के घर की डोरबेल बजाई और सुमित ने दरवाजा खोला। जब सुमित ने दरवाजा खोला तो उसके घर पर उसके साथ एक महिला बैठी हुई थी सुमित ने मेरा परिचय उस महिला से करवाया। मैंने सुमित से पूछा तुमने मुझसे कुछ कहा था? वह मुझे कहने लगा हां मैं तुम्हें कुछ पैसे देना चाहता हूं। मैंने उससे कहा तुम मुझे बाद में भी तो पैसे दे सकते थे लेकिन उसने मुझसे कहा मैं तुम्हें अभी पैसे देना चाहता हूं और उसने मुझे पैसे दिए। मैं अब घर लौट आया था मैं जब घर लौटा तो मेरी पत्नी मेरा इंतजार कर रही थी। मैं और मेरी पत्नी साथ में बैठे हुए थे लेकिन कुछ दिनों बाद मुझे सुमित मिला तो वह मुझे कहने लगा जब उस दिन तुम मेरे घर पर आए थे तो वह भाभी एक नंबर की जुगाड़ है। सुमित ने मुझे कहा उनके साथ मैने बहुत ही मजे लिए थे मैंने सुमित से कहा यार तुमने मुझे तो इस बारे में कुछ बताया ही नहीं था। सुमित मुझे कहने लगा मैं पहले तुम्हे बता देता तो तुम भाभी के साथ मजे ले लेते। मैंने उसे कहा तुम मुझे भाभी का नंबर दे दो? वह मुझे कहने लगा मैं तुम्हें भाभी का नंबर अभी दे देता हूं और उसने मुझे भाभी का नंबर दिया। भाभी का नाम चमेली है मैने भाभी को जब फोन किया तो उन्होंने भी मुझसे बात की और मैं उनसे बात कर के बहुत ज्यादा खुश हो गया था। चमेली भाभी और मै एक दूसरे से फोन पर बात करते। एक दिन मैंने उन्हें मिलने के लिए बुला ही लिया वह जब मिलने के लिए मेरे घर पर आई तो उस वक्त मैं घर पर अकेला ही था और उनके बदन को देखकर मैंने उन्हें अपनी गोद में बैठा लिया और उनकी बड़ी गांड को मैं दबाने लगा।

मैं उनके स्तनों को भी दबाने लगा था उनके होठों को चूम कर मजा आ रहा था। मै उन्हें चोदना चाहता था मैंने कहा चलो हम लोग बेडरूम में चलते हैं। वह कहने लगी ठीक है और हम लोग बेडरूम में गए तो उस वक्त मैं उनके होठों को चूसने लगा। वह मुझे कहने लगी मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पाऊंगी मैंने भी उनके कपड़ों को उतारकर उनके स्तनों का रसपान करना शुरू किया तो थोड़ी ही देर बाद उन्होंने अपनी पैंटी को उतार दिया। जब उनकी पैंटी को उन्होंने उतारा तो मैंने उनकी चूत को चाटना शुरू कर दिया उनकी चूत को चाट कर मुझे मजा आ रहा था और उनकी चूत गिली होने लगी। वह मुझे कहने लगी कल ही तो मैंने अपनी चूत के बाल साफ किए हैं।

मैंने उन्हें कहा आपने यह बहुत ही अच्छा किया अब मैंने भी अपने लंड पर तेल की मालिश की और अपने लंड को उनकी चूत के अंदर घुसा दिया। मेरा मोटा लंड उनकी चूत के अंदर घुसा तो वह मुझे कहने लगी तुम और तेजी से मुझे धक्के मारो मैंने उनको और भी तेजी से धक्के मारने शुरू कर दिया थे और वह अपने मुंह से मादक आवाज मे सिसकिया ले रही थी वह मुझे कहती तुम ऐसे ही मुझे धक्के मारते रहो। मैंने उन्हें बहुत देर तक ऐसे ही धक्के मारे जब मेरा वीर्य बाहर की तरफ को निकलने वाला था। मैंने उन्हें का लगता है मेरा वीर्य निकलने वाला है और थोड़े ही देर बाद मेरा वीर्य बाहर गिर चुका था लेकिन भाभी की चूत के मजे लेकर मुझे बहुत ही अच्छा लगा। उसके बाद मुझे जब भी मौका मिलता तो मैं भाभी को बुला लिया करता और उनके साथ में सेक्स के बहुत ही मजे लिया करता। वह भी बड़ी खुश होती और मुझे कहती तुम्हारे साथ मुझे सेक्स करने में बहुत अच्छा लगता है।