गांड की आदत हो गई

Antarvasna sex stories in hindi, gand marne ki kahani:

Gaand ki adat ho gayi – Antarvasna sex story  मां रसोई में खाना बना रही थी और मैं अपने कमरे में बैठा हुआ था तभी दरवाजे को कोई बड़ी तेजी खटखटा रहा था मां ने मुझे आवाज देते हुए कहा मनीष बेटा देखना दरवाजे पर कौन है मैंने मां से कहा ठीक है मैं अभी देखता हूं। मैं जब दरवाजे पर गया तो मैंने देखा दरवाजे पर अनिल कुमार श्रीवास्तव थे वह ब्याज पर पैसे देने का काम करते हैं और उनकी आंखों में काफी गुस्सा दिखाई दे रहा था। उन्होंने मुझसे कहा क्या तुम्हारे पापा घर पर नहीं है मैंने उन्हें कहा नहीं वह तो घर पर नहीं है वह मुझसे कहने लगे घर पर कौन है तो मैंने उन्हें कहा घर पर मां है। वह मुझसे बात कर रहे थे कि तभी मां भी रसोई से आई और वह श्रीवास्तव जी को देख कर कहने लगी कि श्रीवास्तव जी आइए आपके लिए चाय बना देती हूं। वह कहने लगे कि मुझे चाय नहीं पीनी है मैं अपने पैसे लेने के लिए आया हूं।

मां को यह बात अच्छे से पता थी कि पिताजी ने उनसे पैसे ब्याज पर लिए हैं लेकिन अभी तक उन्होंने वह पैसे लौटाये नहीं है। उन्होंने मां को कहा कि यदि मेरे पैसे मुझे इस महीने के आखिरी तक नहीं मिले तो मैं आपके सर पर छत भी नहीं रहने दूंगा। पिताजी ने घर के कागजात उनके पास गिरवी रखवाय थे इसलिए शायद हमारे सर पर छत भी नहीं रहने वाली थी श्रीवास्तव जी तो घर से जा चुके थे लेकिन घर का माहौल गमगीन हो चुका था। मुझे भी यह बात पता नहीं थी कि पिताजी ने उनसे प्याज में कुछ पैसे लिए हुए हैं लेकिन अब मुझे यह बात पता चल चुकी थी और मैं भी इस बात से बहुत चिंतित था। जैसे ही पिताजी घर पर आए तो वह हमें देखते हुए कहने लगे कि तुम लोग इतने उदास क्यों बैठे हुए हो तो माँ ने माने पिताजी से कहा श्रीवास्तव जी घर पर आए थे और धमकी देकर गए हैं कि यदि इस महीने के आखिरी तक पैसे नहीं लौटाए तो मैं घर बेच दूंगा। पिताजी भी दुखी हो गये और वह सोफे पर बैठे हुए थे लेकिन मुझे अभी तक इस बात का कोई पता नहीं था कि आखिरकार पिताजी ने पैसे क्यों लिए थे।

gand marne ki kahani जब मुझे मेरी मां ने यह बात बताई कि उन्होंने मेरी पढ़ाई के लिए श्रीवास्तव जी से पैसे लिए थे और आधे पैसे उन्होंने लौटा भी दिए थे लेकिन अभी तक वह पूरे पैसे नहीं लौटा पाए हैं। पिताजी चाहते थे कि मैं पढ़ लिख कर एक बड़ा आदमी बनूं क्योंकि पिताजी ने अपने जीवन में हमेशा ही संघर्ष किया है और वह चाहते थे कि मैं उनकी तरह संघर्ष ना करूं इसीलिए उन्होंने मुझे पढ़ने के लिए बेंगलुरु भेज दिया था। मुझे इस बात की कोई खबर नहीं थी और मैं इस बात से अनजान था लेकिन हम लोगों के पास अब शायद पैसे नहीं थे जो हम श्रीवास्तव जी को दे पाते। आखिरकार हमारा घर श्रीवास्तव जी ने बेच दिया और हमें अपना घर छोड़ना पड़ा, हम लोग अब किराए के मकान में रहने लगे थे मैं बेंगलुरु में ही अपनी पढ़ाई कर रहा था लेकिन मुझे अपने घर की बहुत चिंता सताती रहती। पिताजी से मेरी अक्सर फोन पर बात होती रहती थी तो वह मुझे कहते की बेटा तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो सब कुछ ठीक हो जाएगा। मैं अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे रहा था और मैं चाहता था कि जल्दी से अपनी पढ़ाई खत्म कर के कुछ कर सकूं ताकि मेरे मां बाप को मैं इस तकलीफ से निकाल पाऊं। हमारे सर पर छत भी नहीं थी और हम लोग किराए के एक छोटे से घर में रह रहे थे मेरी पढ़ाई पूरी होने वाली थी और उसी दौरान हमारे कॉलेज में कैंपस प्लेसमेंट आया तो मैं चाहता था कि किसी भी तरीके से मेरा प्लेसमेंट में सिलेक्शन हो जाय। मेरा एक अच्छी कंपनी में सिलेक्शन हो गया मुझे वह लोग अपनी कंपनी में रखने के लिए तैयार हो चुके थे और मेरी तनख्वाह भी अच्छी थी। अब मैं अच्छे सैलेरी पैकेज पर कंपनी ज्वाइन करने वाला था थोड़े ही समय बाद मैंने कंपनी ज्वाइन कर ली मेरे माता-पिता इस बात से बहुत खुश थे और वह लोग मुझे कहने लगे कि बेटा हम लोग तो हमेशा से ही चाहते थे कि तुम पढ़ लिखकर कुछ अच्छा कर सको। अब मैं भी उनके सपनों को पूरा करना चाहता था देखते ही देखते समय बीत गया पता ही नहीं चला कि मुझे नौकरी करते हुए कब एक माह हो चुका है। एक महीने बाद जब मेरे हाथ में पहली तनख्वाह आई तो मैं बहुत खुश हुआ और मैंने वह पैसे अपने माता पिता को भिजवा दिए वह लोग बहुत खुश थे। मैं हर महीने अपनी तनख्वाह से कुछ पैसे अपने माता पिता को भिजवा देता लेकिन मेरा सपना था कि पहले मैं उन लोगों के लिए घर खरीद सकूं। मुझे नौकरी करते हुए दो वर्ष बीत चुके थे और इन दो वर्षों में मैंने थोड़े बहुत पैसे भी जमा कर लिए थे मैं चाहता था कि मैं अब उनके लिए घर खरीद लूँ।

gand marne ki kahani मैंने उन लोगों के लिए एक घर खरीदने की सोच ली थी मैंने अपने दोस्त की मदद से उनके लिए घर ले लिया और जब वह लोग नए घर में आए तो कहने लगे कि बेटा यह तो बहुत ही अच्छा है। वह लोग बहुत खुश थे अब वह लोग नये घर में आकर इतने खुश थे कि वह मुझे कहने लगे कि बेटा यह सब तुम्हारी वजह से ही हो पाया है उनके चेहरे की खुशी मेरे लिए एक सुकून देने वाली थी। मैं इस बात से बहुत खुश था कि कम से कम मैं अपने माता पिता के लिए कुछ कर पाया मैं बेंगलुरु में ही जॉब कर रहा था और मैं अपनी छुट्टियों में अपने माता पिता से मिलने के लिए आता रहता था। मैं अपने घर आया हुआ था और जब मैं अपने घर आया तो मेरे पिताजी ने मुझे कहा कि बेटा मेरी तबीयत आजकल ठीक नहीं रहती है और मैं चाहता हूं कि तुम शादी कर लो। मैंने पिताजी से कहा पिताजी अभी मैं शादी नहीं करना चाहता अभी मेरी उम्र सिर्फ 27 वर्ष की ही तो है वह कहने लगे कि बेटा यह सब तो ठीक है लेकिन मैं चाहता हूं कि तुम शादी कर लो। मैंने पिताजी को कहा ठीक है पिताजी मैं इस बारे में आप को सोच कर बताऊंगा, मैं कुछ दिनों तक अपने घर पर रहने वाला था और फिर मैं बेंगलुरु लौट गया।

जब मैं बेंगलुरु लौटा तो हमारी ही कंपनी में काम करने वाले मेरे दोस्त जिसका नाम रितेश है रितेश ने मुझे बताया कि वह अपने मामा जी के घर जा रहा है। रितेश ने मुझे कहा कि क्या तुम भी मेरे साथ चलोगे तो मैंने उसे कहा नहीं रितेश मैं तुम्हारे साथ नहीं आ पाऊंगा लेकिन रितेश ने मुझे कहा कि आज तुम मेरे साथ चलो। मैं उसे मना ना कर सका और रितेश के साथ मैं जाने के लिए तैयार हो गया। हम लोग ऑफिस खत्म होने के बाद रितेश के मामा जी के पास जाने वाले थे। मैं अपने दोस्त के साथ जब उसके मामा जी के घर पर गया तो उसकी मामी की को देखकर मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा था वह बिल्कुल भी सही नहीं लग रही थी हालांकि वह दिखने में तो बहुत अच्छी है लेकिन उनकी नजरे मुझे कुछ ठीक नहीं लग रही थी। उन्होंने किसी प्रकार से मेरा नंबर ले लिया हम लोग जब रितेश के मामा जी के घर से वापस लौटा तो मैं रितेश की मामी के बारे में सोचता रहा। जब उन्होंने मुझे फोन किया तो मुझे उनसे बात करना ठीक नहीं लगता लेकिन वह मेरे पीछे पड़ चुकी थी और मैंने तो सोचा क्यों ना मैं उनकी इच्छा को पूरा कर ही दूं। जब उन्होंने मुझे अपने घर पर बुलाया तो उस दिन उनके घर पर कोई भी नहीं था मैं भी उनके घर पर चला गया। मामी के बुलाने पर मैं जब उनके घर पर गया तो मैं और वह साथ में बैठे हुए थे मैंने उनकी जांघ को सहलाना शुरू किया तो उन्होंने भी मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए मुझे अपनी और खींचा और मुझे कहा कि मुझे आज तुम अपना बना लो। मैंने भी उनके होंठों को अपने होंठों से टकराना शुरू किया और उन्हें वहीं बिस्तर पर लेटा दिया। मैंने अब उनके ब्लाउज को खोल दिया था उनकी ब्लाउज को मैंने उतार फेंका तो वह मुझे कहने लगी कि तुम मेरे स्तनों से मेरा दूध भी बाहर निकाल दो। मै उनके स्तनों के पूरी तरीके से मजे ले रहा था मैं उनके स्तनों का रसपान कर रहा था तो मुझे बहुत ही मजा आ रहा था काफी देर तक उनके स्तनों के मैने मजे लिए।

gand marne ki kahani हम दोनों ही अपने आपको रोक ना सके उन्होंने अपनी साड़ी ऊपर की तो उनकी चूत को देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया उनकी चूत पर भूरे रंग के हल्के बाल थे और वह चाहती थी कि वह मेरे लंड को चूसे। उन्होंने मेरे लंड को पहले तो बहुत देर तक अपने मुंह के अंदर लेकर चूसा उससे मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था। मैंने उनकी चूत का रसपान करना शुरू किया उनकी चूत को मैंने चाटा तो उनकी चूत से निकलता हुआ पानी कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगा था। मैंने जैसे ही उनकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसाया तो मुझे मजा आने लगा मैं उनके दोनों पैरों को खोलकर उन्हें तेज गति से धक्के मार रहा था उनकी चूत मारने का मौका मुझे मिला था और मैं बड़ी तेज गति से उन्हे धक्के मार रहा था। मैंने बहुत देर तक उनको धक्के दिए मेरा वीर्य उनकी चूत में गिरा तो मैंने उनकी चूतड़ों को अपनी तरफ किया और उनकी गांड के अंदर मैंने अपनी उंगली को घुसा दिया।

मैं उनके गांड देखकर उनकी गांड मारना चाहता था मैंने भी अपने लंड पर तेल की मालिश की और उनकी गांड के अंदर अपने लंड को घुसाना शुरू किया उनकी गांड के अंदर तक मेरा लंड जा चुका था। मैं उन्हें तेज गति से धक्के मारने लगा मेरा लंड उनकी गांड के अंदर बाहर हो रहा था तो मुझे बहुत ही मजा आ रहा था और मैं बहुत देर तक उन्हें धक्के मारता रहा। मैं उनकी गांड के मजे जिस प्रकार से ले रहा था उससे वह इतनी ज्यादा खुश हो गई थी कि वह मुझे कहने लगी तुम और तेजी से मुझे धक्के मारो। मैंने भी उन्हें बहुत तेजी से धक्के मारने शुरू कर दिए थे और उनकी गांड के अंदर बाहर जब मेरा लंड हो रहा था तो वह अपने मुंह से सिसकियां ले रही थी और जिस प्रकार से वह अपनी चूतड़ों को मुझसे टकरा रही थी मुझे बहुत ही मजा आ रहा था और मैं उन्हें लगातार तेज गति से धक्के मार रहा था। मुझे उन को धक्के मारने में बहुत ही आनंद आ रहा था काफी देर तक उनकी गांड में मजे मैंने लिए और अब वह बहुत ही ज्यादा खुश हो चुकी थी। मेरा वीर्य भी गिरने वाला था और जैसे ही मेरा वीर्य गिरा। उन्होंने मुझे कहा तुम मुझसे मिलते रहना मैंने उन्हें कहा क्यों नहीं मैं आपसे मिलता ही रहूंगा। अब मुझे भी उनकी गांड मारने की आदत हो चुकी थी इसलिए मैं जब भी उनसे मिलने जात तो अक्सर उनकी गांड के मजे लिया करता।