मैंने संजना को घोडी बना कर चोदा डाला

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Maine Sanjana ko ghodi bana kar chod dala मेरे पिताजी स्कूल में क्लर्क हैं उन्होंने काफी मेहनत से हमें पढ़ाया है और मैं अपनी एम.बीए की पढ़ाई पूरी कर चुका था एम.बीए की पढ़ाई पूरी करने के दौरान ही हमारे कॉलेज में कैंपस प्लेसमेंट में मेरा सिलेक्शन हो गया और मेरा सिलेक्शन होने के बाद मैं दिल्ली की कंपनी में जॉब करने लगा। जब मैं पहली बार अपने ऑफिस गया तो मुझे काफी असहज महसूस हो रहा था लेकिन धीरे-धीरे मुझे आदत हो चली थी और मैं अपने काम के प्रति बहुत ही वफादार रहने लगा। मैं एक छोटे से शहर का रहने वाला हूं लेकिन उसके बावजूद भी मैंने दिल्ली में अब सब कुछ मैनेज कर लिया था मेरे माता-पिता भी इस बात से बहुत खुश थे कि मैं अपने पैरों पर खड़ा हो चुका हूं और अपनी जिम्मेदारी खुद उठा रहा हूं। सब कुछ अच्छे से चल रहा था मेरे ऑफिस में मेरा दोस्त रमेश जो दिल्ली का ही रहने वाला है और रमेश के साथ मेरी बहुत अच्छी दोस्ती है।

एक दिन रमेश मुझे कहने लगा कि चलो हर्षित आज हम लोग कहीं चलते हैं और रात के वक्त हम लोग पब में चले गए मुझे शराब पीने की आदत नहीं है लेकिन रमेश कभी-कबार शराब पी लिया करता है। वह ड्रिंक कर रहा था कि तभी उस पार्टी के दौरान मुझे एक लड़की नजर आई और मैं उसकी तरफ देखता ही रहा उस लड़की को देखकर मुझे एक अलग ही फीलिंग पैदा हो रही थी और मेरी नजरों से जैसे वह हट ही नहीं रही थी। रमेश मुझे कहने लगा कि तुम काफी देर से उस लड़की की तरफ देख रहे हो मैंने रमेश को कहा मुझे वह लड़की बहुत अच्छी लग रही है। मेरा दोस्त मुझे कहने लगा कि चलो हम उससे बात करते हैं लेकिन मैंने रमेश को मना कर दिया परंतु रमेश को नशा हो चुका था वह उस लड़की के पास चला गया और उससे बात करने लगा जिससे कि मुझे शर्मिंदगी महसूस होने लगी मुझे यह बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा। रमेश ने उस लड़की से बात की मुझे तो पहले लग रहा था कि शायद वह अभी हमें डांट देगी लेकिन उस लड़की ने हमसे अच्छे से बात की और अपना परिचय दिया।

जब संजना ने मुझे अपना परिचय दिया तो वह मुझसे कहने लगी कि हर्षित तुम शरमा रहे हो तो मैंने उससे कहा नहीं तो ऐसा कुछ भी नहीं है। संजना और मैं आपस में बात कर रहे थे और रमेश भी संजना से बात कर रहा था मैंने संजना को कहा क्या तुम अकेली आई हो तो वह कहने लगी कि हां मैं तो हमेशा यहां अकेले ही आती हूं। मुझे संजना के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं था और ना ही पहली मुलाकात में संजना ने मुझे कुछ बताया लेकिन पहली मुलाकात हम लोगों की इतनी अच्छी हुई कि मुझे ऐसा लगा कि जैसे हम लोग एक दूसरे को काफी वर्षों से जानते हैं। उसके बाद संजना ने मेरा नंबर ले लिया था मुझे तो लगा था कि शायद संजना मुझे कभी फोन भी नहीं करेगी लेकिन संजना को मेरा साथ इतना अच्छा लगा कि उसके बाद भी उसने मुझे फोन किया। जब उसने मुझे फोन किया तो उस वक्त मैं अपने ऑफिस में था संजना ने मुझे कहा कि हर्षित जब तुम फ्री हो जाओगे तो मुझसे मिलना मैंने संजना को कहा ठीक है। मैंने जब संजना को फोन किया तो संजना मुझे कहने लगी कि क्या हम लोग अभी कुछ देर के लिए कॉफी शॉप में मिल सकते हैं मैंने भी सोचा कि क्यों ना मैं संजना को जाकर मिल लूं। मैं जब संजना को जाकर मिला तो मुझे नहीं पता था कि वह इतनी ज्यादा दुखी होगी उस दिन संजना का चेहरा उतरा हुआ था उसने मुझे बताया कि वह अपने शादीशुदा जीवन से बहुत दुखी हो चुकी है। मैंने संजना को कहा कि लेकिन तुम इतनी ज्यादा परेशान क्यों हो तुम तो एक बहुत ही बिंदास लड़की हो और तुम किसी भी चीज के बारे में कभी सोचती नहीं हो लेकिन जब मुझे संजना ने अपने पति के बारे में बताया तो मुझे भी लगा कि संजना बहुत ज्यादा दुखी है। संजना ने मुझे बताया कि उसके पति ने उसे कभी कुछ खुशियां दी ही नहीं संजना ने मुझे बताया कि उसके पति और उसकी लव मैरिज हुई लेकिन लव मैरिज होने के कुछ समय बाद ही वह संजना के परिवार वालों से दहेज की मांग करने लगा औऱ संजना के परिवार ने उसकी मांगों को पूरा किया क्योंकि संजना के पिताजी एक बड़े बिजनेसमैन है लेकिन धीरे-धीरे उसकी डिमांड और भी ज्यादा बढ़ने लगी। संजना ने मुझे बताया कि वह अपने मम्मी पापा के साथ रहती है मैंने संजना को कहा क्या तुम अपने पति के साथ नहीं रहती।

वह मुझे कहने लगी नहीं हर्षित मैं अपने पति के साथ नहीं रहती हूं मैंने उसे डिवोर्स देने के बारे में सोच लिया है लेकिन इस वजह से मेरी जिंदगी पूरी तरीके से बर्बाद हो गई और मैं आज तक अपने आप को माफ नहीं कर पाई क्योंकि वह मेरा खुद का फैसला था मैंने सोचा था कि मैं लव मैरिज कर के खुश रहूंगी लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि लव मैरिज करना मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल होगी और यही भूल आज मुझे हर रोज परेशान करती है मैं जब भी इस बारे में सोचती हूं तो मुझे लगता है कि मैंने अपनी जिंदगी में बिल्कुल भी सही फैसला नहीं लिया मेरा इस सबसे गलत फैसला था और इसी वजह से तो मैं इस बात से इतनी ज्यादा दुखी हो चुकी हूं कि मैं कई बार मानसिक रूप से परेशान हो जाती हूं। मैंने संजना को कहा संजना तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो तुम्हारे जीवन में सब कुछ ठीक हो जाएगा।

मुझे तो ऐसा लगा कि जैसे संजना का साथ मुझे मिल चुका है मुझे यह बात नहीं पता थी कि वह शादीशुदा है लेकिन उसने जब मुझसे यह बात कही तो मेरे दिल में भी अब संजना को लेकर कुछ तो चल रहा था मैं संजना को प्यार करने लगा था। मुझे नहीं मालूम था कि हम दोनों का प्यार इतना आगे बढ़ जाएगा कि हम दोनों साथ में रहने का फैसला कर लेंगे संजना को उसके पति ने अभी तक डिवोर्स नहीं दिया था और मैं चाहता था कि संजना के पति उसे डिवोर्स दे दे लेकिन यह सब अभी इतना आसान होने वाला नहीं था। हम लोग हर रोज एक दूसरे से मुलाकात करते और संजना जब भी दुखी होती तो वह मुझे फोन कर देती फिर मैं उससे मिलने के लिए चला जाया करता। मुझे तो ऐसा लगने लगा था कि जैसे संजना मेरे जीवन में इतनी ज्यादा अहमियत रखती है कि मैं उसके बिना एक पल भी नहीं रह सकता और शायद यह बात बिल्कुल ठीक थी क्योंकि जब भी संजना से मेरी बात नहीं होती तो मुझे ऐसा लगता कि जैसे मेरा दिन अधूरा ही रह गया है। हम दोनों का रिश्ता अब काफी आगे बढ़ चुका था। संजना और मेरे बीच का रिश्ता बहुत अच्छा होता जा रहा था संजना मेरे बिना बिल्कुल भी रह नहीं सकती थी। एक दिन संजना ने मुझे कहा मुझे तुमसे मिलना है उस दिन संजना बहुत ज्यादा दुखी नजर आ रही थी वह मुझसे मिलने के लिए मेरे घर आई, हम दोनों साथ में बैठे हुए थे। वह इतनी ज्यादा दुखी हो गई उसने मुझे गले लगाते हुए कहा हर्षित मैं तुमसे शादी करना चाहती हूं और मुझे तुम्हारी बहुत जरूरत है। मैंने संजना को कहा संजना मुझे भी तुम बहुत पसंद हो और मैं भी तुम्हारे साथ अपना जीवन बिताना चाहता हूं लेकिन उसके लिए मुझे थोड़ा समय चाहिए। संजना भी यह बात भलीभांति जानती थी उस दिन जब संजना को मैने बांहो मे लिया तो मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पाया। मैंने जैसे ही संजना के होंठों को चूमना शुरु किया तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था उसके होठों को चूमकर मेरे अंदर की गर्मी इतनी अधिक हो चुकी थी कि मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पाया। हम दोनों एक दूसरे के बदन को अच्छे से महसूस कर रहे थे और काफी देर की चुम्मा चाटी के बाद जब मेरे अंदर से गर्मी बाहर की तरफ को निकलने लगी तो मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पाया और मैंने संजना को कहा मुझे लगता है शायद मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पाऊंगा।

जब मैंने संजना के सामने अपने लंड को किया तो उसने मेरे मोटे लंड को अपने मुंह के अंदर समा लिया। वह बड़े ही अच्छे से सकिंग कर रही थी वह मुझे कहने लगी मुझे बड़ा ही अच्छा लग रहा है। संजना मेरे मोटे लंड को अपने मुंह के अंदर तक ले रही थी। मेरे अंदर की गर्मी इतनी ज्यादा बढ़ने लगी थी मैंने भी उसके स्तनों को चूसना शुरू किया और उसके स्तनों को मैंने बहुत देर तक चूसा। मैंने संजना के दोनों पैरों को खोला तो उसकी चूत पर मैंने अपनी जीभ को लगाया और जैसे ही मैंने अपनी जीभ को उसकी चूत पर लगाया तो वह उत्तेजित हो चुकी थी। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था मैंने संजना की चूत से निकालते हुए पानी को अंदर तक ले लिया था। मै अपने आपको बिल्कुल रोक ना सका मैंने जब अपने लंड को उसकी चूत के अंदर बाहर करना शुरू किया तो वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है।

संजना मेरा साथ बड़े अच्छे से दे रही थी उसने अपने पैरों को खोल दिया मैं जब उसे धक्के मारता तो मुझे इतना आनंद आता कि मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं उसे चोदता रहूं। जब संजना की चूत के अंदर बाहर लंड हो रहा था तो संजना ने मुझे कहा मेरी चूत की चिकनाई मै बहुत ज्यादा बढोतरी हो चुकी है। मैंने उसे कहा क्या तुम घोड़ी बन सकती हो? संजना ने अपनी चूतडो को मेरे सामने किया और जैसे ही उसकी चूतडे मेरे सामने हुई तो मैंने अपने लंड को उसकी चूत के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया वह बड़ी तेजी से चिल्ला रही थी। मेरा लंड उसकी चूतड़ों से बड़ी तेजी से टकरा रहा था वह भी मुझसे चूत मरवाकर बहुत ज्यादा खुश थी। मैंने उसे कहा मुझे तुम्हें चोदने में बहुत मजा आ रहा है। वह मुझे कहने लगी तुम मुझे बस ऐसे ही धक्के देते रहो मैंने उसे बहुत देर तक धक्के दिए। जब मेरे अंदर की गर्मी बढ़ने लगी तो मेरा वीर्य गिर चुका था मेरा वीर्य जैसे ही गिरा तो मैंने उसे कहा आज तो मुझे मजा आ गया। हमने उसके बाद तो ना जाने कितनी बार एक दूसरे के साथ सेक्स किया लेकिन अभी तक हम दोनों ने एक दूसरे से शादी नहीं की है और ना ही इस बारे मे सोचा है लेकिन हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत ज्यादा खुश हैं।