पुरानी प्रेमिका संग रास रचाया

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Purani premika sang raas rachaya मेरी बहन मुझे कहने लगी कि चलो ना भैया आज सुपरमार्केट चलते हैं मैंने निकिता से कहा लेकिन वहां जाकर हम लोग क्या करेंगे वैसे तो आज मेरे ऑफिस की छुट्टी है लेकिन मेरा मन आज घर पर आराम करने का है। निकिता कहने लगी भैया आप तो हमेशा ही आराम करते रहते हो कभी मेरी भी सुन लिया करो। मेरी मां ने शायद यह बात सुन ली थी तो वह कहने लगे अरे कभी अपनी बहन के साथ भी चले जाया करो मैंने मां से कहा चलो मां अब आपने कह दिया है तो मुझे जाना ही पड़ेगा। मैं निकिता के साथ सुपर मार्केट जाने की तैयारी करने लगा निकिता को तैयार होने में अभी समय था मैं तैयार हो चुका था मैंने निकिता से कहा जल्दी से तैयार हो जाओ लेकिन अभी तक वह तैयार नहीं हुई थी। मैं निकिता का इंतजार कर रहा था निकिता जब तैयार हो गई तो हम लोग वहां से सुपर मार्केट चले गए हमारे घर से सुपर मार्केट की दूरी करीब 8 किलोमीटर थी।

जब हम लोग वहां पहुंचे तो निकिता मुझसे कहने लगी भैया मेरे लिए आज आप क्या लेने वाले हो मैंने निकिता से कहा ठीक है तुम्हें जो पसंद आता है तुम ले लो। निकिता ने भी अपने लिए शॉपिंग करनी शुरू कर दी और उसने ना जाने क्या क्या खरीद लिया था हम लोग शॉपिंग कर के मॉल से बाहर ही निकले थे कि तभी मुझे अक्षिता दिख गयी। अक्षिता मुझे दो वर्ष बाद मिल रही थी अक्षिता ने मुझे देखते ही अपना रास्ता बदल दिया मुझे समझ नहीं आया कि उसने ऐसा क्यों किया। अक्षिता और मेरे बीच में पहले बहुत ज्यादा प्रेम था हम दोनों एक दूसरे के साथ प्रेम संबंध में थे लेकिन जब अक्षिता का व्यवहार बदलने लगा तो मुझे कुछ ठीक नहीं लगा। मैंने उससे इस बारे में बात भी की थी लेकिन अक्षिता के सपने बड़े थे और वह किसी अमीर घराने ने के लड़के से शादी करना चाहती थी इसी वजह से मैंने अक्षिता के साथ ब्रेकअप कर लिया था और हम दोनों अब अपने रास्ते को अलग कर चुके थे। मुझे अक्षिता से कोई लेना देना नहीं था और ना ही उसे मेरे जीवन से कुछ लेना देना था मैं अब उससे काफी ज्यादा दूर जा चुका था। हम दोनों अब कार में बैठ चुके थे और मैं वहां से घर चला आया लेकिन अभी मेरे दिमाग में सिर्फ अक्षिता का ख्याल चल रहा था।

अक्षिता के बारे में निकिता को कुछ भी मालूम नहीं था क्योंकि निकिता उसे कभी मिली ही नहीं थी और ना ही मैंने अक्षिता और अपने बीच के रिलेशन को किसी को बताया था। हम दोनों हमेशा ही चोरी छुपे मिला करते थे और मैंने कभी भी अक्षिता के बारे में अपने घर में कुछ नहीं बताया था इस बात से मुझे बहुत दुख था कि अक्षिता ने मेरे साथ बहुत गलत किया लेकिन अब मैं यह सब भूलकर आगे बढ़ चुका था और अपने आने वाले जीवन को मैं पूरी तरीके से बदलना चाहता था इसलिए मैंने मेहनत करनी शुरू कर दी। मैं अपने काम के प्रति बहुत ही ज्यादा ईमानदार और वफादार था मेरे ऑफिस में मेरे बॉस मुझे कहते कि जिस प्रकार से तुम मेहनत करते हो तुम्हें देख कर लगता है कि शायद मेरा बीता हुआ कल तुम हो। उनकी बात से मुझे लगता है कि उन्हें मुझ में कुछ तो दिखता है और इसीलिए तो इतनी बड़ी बात वह मुझे कहते हैं। मेरे बॉस ने भी अपने जीवन में काफी मेहनत की है और आज वह इतने समय बाद किसी अच्छे मुकाम पर पहुंचे हैं यह सब उनकी मेहनत का ही नतीजा है। मैं और निकिता घर पहुंच चुके थे मेरी मां कहने लगी आज तो लगता है तुम लोगों ने शॉपिंग कर ही ली मैंने मां से कहा मां मैंने अपने लिए कुछ भी नहीं खरीदा सिर्फ निकिता के लिए खरीदा है। मां कहने लगी अपने लिए भी खरीद लेते मैंने मां से कहा कुछ समय पहले ही तो मैंने अपने लिए शॉपिंग की थी मां कहने लगी ठीक है बेटा तुम देख लो। हम लोग साथ में बैठकर डिनर कर रहे थे अगले दिन सुबह मैं अपने ऑफिस जाने लगा था और ऐसा कुछ भी नया नहीं था जो कि मुझे लगता कि कुछ नया हो रहा है वही हर रोज की तरह ऑफिस जाओ और शाम को घर लौट आओ। जीवन में कुछ भी नया नहीं था मुझे चाहिए था कि कुछ नयापन हो इसीलिए मैं सपने दोस्तों के साथ घूमने के बारे में सोचने लगा मैंने अपने दोस्तों से कहा कि कहीं घूमने के लिए चला जाए।

वह कहने लगे यार तुम्हें तो मालूम है ना कि गर्मी कितनी हो रही है और छुट्टी भी मिल पाना मुश्किल ही लग रहा है मैंने उन्हें कहा लेकिन फिर भी तुम कोशिश तो करो तुम्हे जरूर छुट्टी मिल जाएगी। मेरा दोस्त मोहन मुझे कहने लगा कि हर किसी की किस्मत तुम्हारे जैसी नहीं होती तुम तो पूरी तरीके से अपने जीवन में इंजॉय कर रहे हो लेकिन हमें नहीं लगता कि हमारा जीवन कुछ खास ठीक चल रहा है। मैंने उन्हें कहा लेकिन तुम ऐसा क्यों कह रहे हो वह मुझे कहने लगे तुम्हारे बॉस तुम्हारे ऊपर हमेशा ही मेहरबान रहते हैं और हमारे बॉस हम पर बिल्कुल भी मेहरबान नहीं रहते वह हमारी हमेशा ही खाल उधेड़ने पर लगे रहते हैं। मैंने उन्हें कहा दोस्त ऐसा कुछ भी नहीं है वह सिर्फ मेरे काम की तारीफ किया करते हैं मैंने उन्होंने समझाया तो वह कहने लगे चलो अभी वह बात छोड़ो यह बताओ कि घूमने के लिए कहा जाए। मैंने उन्हें कहा क्यों ना हम लोग बुलेट से घूमने के लिए कहीं चले और हम लोगों की सहमति बन चुकी थी। काफी समय हो चुका था जब बुलेट से हम लोग कहीं गए भी नहीं थे मेरी बुलेट भी घर में ही रखी हुई थी। मैं जब उस दिन ऑफिस से घर लौटा तो मैंने उस बुलेट को अपने सामने ही वॉशिंग वाले को दी और जब मैंने बुलेट की वॉशिंग करवा दी तो वह मुझे कहने लगे कि लगता है आप की बुलेट काफी दिन से घर में ही खड़ी थी। मैंने कहा हां भाई साहब बुलेट तो काफी दिनों से घर में ही खड़ी थी क्योंकि इसे कोई चलाता ही नहीं है वह कहने लगे आप इसे चलाया कीजिए।

मैंने कहा हां अब मैं इसे लेकर मनाली जा रहा हूं तो तब इसे चलाना हो होगा ही और अब हम लोगों ने मनाली जाने का फैसला कर लिया था क्योंकि हम लोग चाहते थे कि हम लोग कुछ एडवेंचर ट्रिप करें उसके लिए हम लोग मनाली जाना चाहते थे। मनाली से होते हुए हम लोग मैकलोड़ गंज जाना चाहते थे लेकिन इसे मेरी किस्मत ही कहें या कोई बड़ा इत्तेफाक जो मुझे अक्षिता मनाली में मिल गई। अक्षिता जब मुझे मनाली में मिली तो उससे मैं अपनी नजरे बचाने की कोशिश करने लगा लेकिन वह मेरी तरफ आई और कहने लगी सुधीर तुम तो मुझसे नजरे बचाने की कोशिश कर रहे हो। मैंने उससे कहा देखो अक्षिता अब हमारे बीच में ऐसा कुछ भी नहीं है और हम लोगों का एक दूसरे से अलग रहना ही ठीक रहेगा। वह मुझे कहने लगी हां ठीक है हम लोग अब एक दूसरे के साथ रिलेशन में नहीं है लेकिन एक दूसरे से बात तो कर सकते हैं मैंने अक्षिता से कहा ठीक है। मेरे दोस्त कहने लगे कि हम लोग होटल में जा रहे हैं तुम होटल में ही आ जाना और वह लोग होटल में चले गए। मैं अक्षिता के साथ ही बैठा हुआ था और उसके साथ पुरानी बातें करने लगा और कुछ देर बाद ही मैं होटल में चला गया। मैं अपने होटल में तो जा चुका था लेकिन अब भी मेरे दिमाग में अक्षिता का ख्याल चल रहा था मैं मन ही मन सोचने लगा अक्षिता से क्या दोबारा मिलना चाहिए लेकिन मेरे दिल ने कहा कि हां अक्षिता से मुझे दोबारा मिलना चाहिए और मैं अक्षिता से दोबारा मिला। उसे मैंने अपने साथ आने के लिए मजबूर कर दिया और वह मेरे साथ होटल में चली आई। अब वह मेरे साथ होटल में आई तो हम दोनों आपस में बात कर रहे थे और कुछ पुरानी यादें भी ताजा होने लगी।

हम दोनों के बीच हुए पहले ही किस को लेकर भी बातें होने लगी थी किस प्रकार से हम लोगों ने पहली बार चुंबन किया था। हम लोगों ने जब पहली बार चुंबन किया तो वह यादें आज तक मेरे दिमाग में थी और मैं चाहता था कि मै अक्षिता के साथ दोबारा से वैसा ही कुछ करो। उसे देखकर मेरा मन दोबारा से उसके साथ सेक्स संबंध बनाने का हुआ और मैंने उसके होठों को चूम लिया जैसे ही उसके नरम और गुलाबी होठों पर मेरे होठों का रसपास हुआ तो वह भी अपने आपको ना रोक सका। मैं भी अपने आपको ना रोक पाया मैंने भी अपने होठों से उसके होठों को टकराना शुरू किया और जैसे ही मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो अक्षित अपने आपको ना रोक सकी। अक्षिता ने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया जैसे ही उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर लिया तो मुझे भी अच्छा लगने लगा और वह भी पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई थी। उसकी उत्तेजना में दो गुना बढोतरी हो गई थी और मुझे भी बड़ा अच्छा लग रहा था जिस प्रकार से मैंने अक्षिता की गीली हो चुकी चूत पर अपने लंड को सटाकर अंदर की तरफ धक्का देना शुरू किया तो मुझे मजा आने लगा था।

वह भी पूरी तरीके से उत्तेजित होने लगी थी उसकी योनि के अंदर मेरा लंड प्रवेश हो चुका था और मैं उसे बड़ी तेज गति से धक्के मार रहा था। मैंने उसे काफी देर तक धक्के मारे और जिस प्रकार से मैंने उससे चोदा उससे मेरे अंदर की गर्मी बाहर आने लगी। हम दोनों के बदन टकराते तो गर्मी निकल आती और हम दोनों के बदन से गरमाहट पैदा होने लगी। हम दोनों के बदन से इतनी ज्यादा गर्मी बाहर की तरफ निकलने लगी कि मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था और अक्षिता को भी बहुत मजा आ रहा था। हम दोनों एक दूसरे से लिपटे हुए थे मैंने जब अक्षिता को अपने ऊपर से आने के लिए कहा तो वह मेरे ऊपर से आ गई और मैंने उसे धक्के देना शुरू कर दिए। मैं उसे बड़ी तेज गति में धक्के मार रहा था वह भी अपने स्तनों को मेरे लंड के उपर नीचे कर रही थी उसकी चूतडे ऊपर नीचे होती तो मेरे अंदर की गर्मी बढ़ जाती मैंने उसके स्तनों को अपने मुंह में ले लिया और उनका रसपान करने लगा। जैसे ही मैंने अपने वीर्य को अक्षिता की योनि में मैने वीर्य को गिराया तो वह मुझसे लिपट गई और हम दोनों की पुरानी यादें ताजा हो गई।